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Male breast cancer signs: महिलाओं की तरह क्या पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें कैसे दिखते हैं उनमें लक्षण

<p style="text-align: justify;"><strong>Male breast cancer:</strong> अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर यानी ग्राउंड जीरो के आसपास रहने और काम करने वाले पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अब तक 91 पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि की है. हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा साल 2024 तक का है. यह संख्या 2018 में दर्ज मामलों से छह गुना ज्यादा और अमेरिका के नेशनल एवरेज से 90 गुना अधिक है.</p> <p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट का कहना है कि यह एक चिंताजनक है, क्योंकि आमतौर पर पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर बेहद रेयर माना जाता है. सामान्य तौर पर हर एक लाख में सिर्फ एक पुरुष इस बीमारी से प्रभावित होता है. चलिए आपको बताते हैं कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर कैसे होता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर कैसे होता है</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टर के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं है. हर इंसान के शरीर में जन्म से ही थोड़ी मात्रा में ब्रेस्ट टिश्यू मौजूद रहती है, और यही टिश्यू कभी-कभी असामान्य तरीके से बढ़ने लगती है. मायो क्लिनिक के अनुसार, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत आमतौर पर छाती के टिश्यू की सेल्स में हुए बदलाव से होती है. यह कैंसर सेल्स धीरे-धीरे बढ़ती हैं, और समय के साथ लंप या ट्यूमर का रूप ले लेती हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>किन पुरुषों में होता है ज्यादा खतरा</strong></p> <p style="text-align: justify;">हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, यह बीमारी आमतौर पर 60 से 70 वर्ष की उम्र के पुरुषों में देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकती है. CDC और मायो क्लिनिक के अनुसार, कुछ ऐसे कारण हैं, जिसके चलते इसके होने के चांस बढ़ते रहते हैं. इनमें बढ़ती उम्र, हार्मोनल असंतुलन या एस्ट्रोजन थेरेपी, परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, जिसमें पुरुषों के शरीर में एक्स क्रोमोसोम की अतिरिक्त कॉपी होती है, लिवर की बीमारियां जैसे सिरोसिस, मोटापा जिससे शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और टेस्टिकल संबंधी बीमारियां या सर्जरी शामिल हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज</strong></p> <p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट के अनुसार, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया जाता. इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं कि छाती पर बिना दर्द वाली गांठ या सूजन हो, त्वचा में सिकुड़न, लालपन या रंग बदलना, निप्पल का आकार बदलना या अंदर की ओर मुड़ना, निप्पल से तरल या खून का रिसाव और बगल या कॉलरबोन के आसपास सूजन. अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या है बचाव</strong></p> <p style="text-align: justify;">इस बीमारी को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है. डॉक्टर के अनुसार, अगर परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, तो जेनेटिक टेस्टिंग करवानी चाहिए. इसके अलावा, वजन नियंत्रित रखना, अल्कोहल का सेवन सीमित करना, और नियमित सेल्फ एक्जामिनेशन करना बहुत जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें- <a title="Dularchand yadav death: कैसे फट जाता है फेफड़ा, जिससे हुई मोकामा के दुलारचंद की मौत?" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/how-does-a-lung-burst-the-tragic-death-of-mokama-dularchand-3037538" target="_self">Dularchand yadav death: कैसे फट जाता है फेफड़ा, जिससे हुई मोकामा के दुलारचंद की मौत?</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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Benefits of cloves: रोजाना लौंग चबाने से मिलते हैं ये 11 फायदे, जान लेंगे तो भूलकर भी नहीं करेंगे इग्नोर

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Daily walk: 20 मिनट की डेली वॉक या 10 लाख रुपये का होम जिम, आपके हार्ट के लिए क्या बेस्ट? कार्डियोलॉजिस्ट से समझें फायदे का सौदा

<p style="text-align: justify;"><strong>Benefits of daily walk:</strong> महंगे जिम, प्रोटीन पाउडर और फिटनेस गैजेट्स पर लाखों रुपये खर्च करने से पहले जरा सोचिए क्या आपकी सेहत को सच में इन सबकी ज़रूरत है? मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश सिंह के मुताबिक, आपके दिल के लिए सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट किसी जिम मशीन में नहीं, बल्कि रोज़ाना की 20 मिनट की सैर में छिपा है. हाल ही में वायरल हुए अपने पोस्ट में डॉ. सिंह ने बताया कि रोज चलने की छोटी-सी आदत भी शरीर और दिल पर कितना गहरा असर डालती है. उन्होंने कहा कि "सेहत कोई लग्जरी नहीं, एक आदत है और आदतें पैसे से नहीं, नियमितता से बनती हैं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वॉक करने से बेहतर होती है सेहत</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉ. सिंह बताते हैं कि एक दिन की छोटी वॉक भले ही बेकार लगे, लेकिन अगर आप इसे हर दिन करते हैं, तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे अपनी हर वॉक को कैलेंडर पर मार्क करें और हर दिन एक 'X' का निशान लगाएं. जब ये निशान बढ़ने लगते हैं, तो एक तरह का संतोष और मोटिवेशन मिलता है, जिससे दिमाग खुद उस सिलसिले को तोड़ना नहीं चाहता.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>हमारे पास टाइम नहीं है</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टर ने लोगों की एक और आदत पर भी तंज कसा कि "हम सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने, ओटीटी पर शो देखने या बेवजह बहस करने में घंटों निकाल देते हैं, लेकिन जब खुद के लिए 20 मिनट निकालने की बात आती है तो कहते हैं कि टाइम नहीं है." उनका कहना है कि अगर आप दिन के सिर्फ 30 मिनट मोबाइल से हटाकर वॉक, हेल्दी खाना या नींद पर फोकस करें, तो यह आपके दिल के लिए किसी भी लाइक या व्यू से ज़्यादा मूल्यवान होगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वॉकिंग हैक्स</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉ. सिंह ने 'वॉकिंग हैक्स' भी शेयर किए, जो लोगों को नियमित रहने में मदद कर सकते हैं. उनका पसंदीदा तरीका है जिसे वो "कमिटमेंट डिवाइस" कहते हैं. इसमें किसी दोस्त या साथी के साथ वॉक का प्लान बनाइए. उन्होंने कहा कि "जब आप किसी के साथ वॉक पर जाने का वादा करते हैं, तो उसे कैंसिल करना मुश्किल लगता है, लेकिन जाना आसान." यह एक छोटा-सा मनोवैज्ञानिक ट्रिक है जो अच्छी आदतों को आसान और बुरी आदतों को कठिन बना देता है.</p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए. "मैं चलने जा रहा हूँ" की जगह "मुझे चलने का मौका मिला है" कहना शुरू करें. उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया में लाखों लोग हैं जो चाहकर भी चल नहीं सकते. इसलिए चलना एक काम नहीं, बल्कि एक सौभाग्य है. जब आप इस बात को समझ लेते हैं, तो टहलना आपके लिए बोझ नहीं, बल्कि खुद के प्रति आभार का तरीका बन जाता है. डॉ. सिंह के मुताबिक, हार्ट की सेहत सिर्फ महंगी दवाओं या जिम मशीनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन छोटे फैसलों पर जो आप रोज लेते हैं. सुबह उठकर कुछ कदम चलना, गहरी सांस लेना और अपने शरीर को थोड़ा वक्त देना ही असली इन्वेस्टमेंट है जो लंबी उम्र का ब्याज देता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें- <a title="Male breast cancer signs: महिलाओं की तरह क्या पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें कैसे दिखते हैं उनमें लक्षण" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/can-men-also-get-breast-cancer-like-women-know-the-symptoms-men-should-never-ignore-3037853" target="_self">Male breast cancer signs: महिलाओं की तरह क्या पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें कैसे दिखते हैं उनमें लक्षण</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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हर 9 में से 1 भारतीय किसी न किसी बीमारी की चपेट में, ICMR की चौंकाने वाली रिपोर्ट

<div id=":25v" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" style="text-align: justify;" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":28a" aria-controls=":28a" aria-expanded="false"> <p><strong>ICMR Report:&nbsp;</strong>भारत में संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर 9 में से एक व्यक्ति किसी ने किसी संक्रामक बीमारी की चपेट में है. आईसीएमआर ने यह जानकारी अपनी वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब नेटवर्क के डेटा के आधार पर दिए हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते की हर 9 में से 1 भारतीय किसी ने किसी बीमारी की चपेट में कैसे हैं और आईसीएमआर की चौंकाने वाली रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासा हुआ है. <br /><br /><strong>कैसे बढ़ रही है संक्रमण दर?</strong><br /><br />आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मार्च 2025 के बीच लिए 2,28,856 सैंपलों में से 24,502 यानी 10.7 प्रतिशत में संक्रमण पाया गया है. वहीं अप्रैल से जून 2025 के बीच 2,26,095 सैंपलों में से 26,055 यानी 11.5 प्रतिशत संक्रमित पाए गए हैं. इसका मतलब है कि संक्रमण दर में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में संक्रामक बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं और अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण भी बन सकता है. <br /><br /><strong>किन-किन संक्रमणों का बढ़ रहा खतरा?</strong><br /><br />आईसीएमआर की रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए गए संक्रमणों में इनफ्लुएंजा ए, डेंगू , हेपेटाइटिस ए, &nbsp;नोरोवायरस और हर्पीज सिंप्लेक्स वायरस शामिल है. इन बीमारियों के कारण लोगों में सांस लेने से संबंधित संक्रमण, पीलिया, दस्त और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. आईएमसीआर की रिपोर्ट को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही संक्रमण दर में बढ़ोतरी मामूली दिख रही हो, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. यह मौसमी बीमारियों और नए संक्रमणों के लिए एक अर्ली वॉर्निंग के रूप में काम कर सकती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर संक्रमण के तिमाही आंकड़ों की निगरानी जारी रखी गई तो भविष्य में महामारी जैसी कंडीशन को रोका जा सकता है. <br /><br /><strong>2014 से अब तक 40 लाख से ज्यादा सैंपल टेस्ट </strong><br /><br />आईसीएमआर के अनुसार साल 2014 से 2024 के बीच देश भर में 40 लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच की गई है. जिनमें 18.8 प्रतिशत सैंपलों में संक्रमण दर पैदा करने वाले रोगाणुओं की पहचान हुई है. वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि संक्रमण दर बढ़ने की प्रमुख वजहों में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, भीड़भाड़, स्वच्छता की कमी और जलवायु परिवर्तन शामिल है, जो वायरस और बैक्टीरिया को फैलाने के लिए सही माहौल देते हैं. वहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में संक्रामक रोगों के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि संक्रमण दर का यह बढ़ता ट्रेंड फ्यूचर में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ डाल सकता है.</p> <p><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/men-go-silent-women-speak-out-does-depression-see-gender-difference-3037922">Depression in men and women: डिप्रेशन में मर्द चुप हो जाते हैं लेकिन ज्यादा बोलती हैं महिलाएं, क्या यह बीमारी भी देखती है जेंडर डिफरेंस?</a></strong></p> <div id="article-hstick-inner" class="abp-story-detail "> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p> </div> <div class="about-author">&nbsp;</div> </div>

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मोटे लोगों के लिए खुशखबरी! दिल की बीमारियों का रहता है खतरा कम, सामने आई चौंकाने वाली स्टडी

<div id=":25v" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" style="text-align: justify;" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":28a" aria-controls=":28a" aria-expanded="false"> <p>मोटापे को लेकर हाल ही में हुई एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस स्टडी में मोटापे और दिल की बीमारियों के कनेक्शन को चुनौती दी है. आमतौर पर माना जाता है कि मोटापा दिल की बीमारी और हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ता है, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि एमसी4आर का नाम का एक जीन जो मोटापा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है, वही दिल की बीमारियों से बचाव करता है.</p> <p>रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों में एमसी4आर जीन का रेयर वेरिएंट पाया गया है, उनमें एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है और हार्ट डिजीज का खतरा भी घट जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जीन लगभग एक प्रतिशत मोटे लोगों में और पांच प्रतिशत मोटे बच्चों में पाया जाता है. इस रिसर्च के अनुसार, ब्रिटेन में हर 300 में से एक व्यक्ति में यह जीन म्यूटेशन हो सकता है.&nbsp;</p> <p><strong>मोटापे और हार्ट डिजीज के बीच अनोखा कनेक्शन&nbsp;</strong></p> <p>दरअसल, इस रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि कुछ लोग मोटे होने के बावजूद दिल की बीमारियों से कैसे बचे रहते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के मेटाबॉलिज्म एक्सपर्ट्स के अंडर हुई इस स्टडी में पाया गया है कि एमसी4आर जीन हमारे दिमाग में एक ऐसा प्रोटीन बनता है, जो भूख को कंट्रोल करता है. जब यह जीन सही तरीके से काम करता है, तो वह व्यक्ति कम खाता है. लेकिन जब इसमें गड़बड़ी होती है तो व्यक्ति को भूख ज्यादा लगती है और वजन तेजी से बढ़ता है. रिसर्चर्स के अनुसार यह जीन मोटापा बढ़ाने का कारण बनता है, लेकिन इसके रेयर वेरिएंट वाले लोगों में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल काफी कम होता है, इससे हार्ट डिजीज का खतरा घट जाता है.&nbsp;</p> <p><strong>हजारों लोगों पर की गई जांच&nbsp;</strong></p> <p>स्टडी में 7,719 बच्चों और 124 वयस्कों के जीन पर रिसर्च की गई, जिनमें मोटापा एमसी4आर जीन की गड़बड़ी के कारण था. &nbsp;इसके अलावा इसके बाद उनकी तुलना यूके के बायो बैंक के 3.36 लाख लोगों से की गई. जिसके रिजल्ट में पता चला कि एमसी4आर की कमी वाले व्यक्तियों में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल बेहतर रहे और उनके दिल की सेहत आम लोगों से बेहतर पाई गई है.&nbsp;</p> <p><strong>क्या कहती है रिपोर्ट?</strong></p> <p>इस रिसर्च के रिजल्ट में बताया गया है कि एमसी4आर जीन शरीर के फैट मेटाबॉलिज्म को दिमाग के जरिए कंट्रोल करता है. जिन लोगों में यह जीन सही से काम नहीं करता है उनमें मोटापा तो बढ़ता है, लेकिन ट्राइग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम रहता है. वहीं इस रिसर्च को लेकर रिसर्चर्स का कहना है कि एमसी4आर जीन की कार्यप्रणाली को समझ कर दिल की बीमारियों और हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज के लिए नई दवाएं बनाई जा सकती हैं.</p> <p><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/can-men-also-get-breast-cancer-like-women-know-the-symptoms-men-should-never-ignore-3037853">Male breast cancer signs: महिलाओं की तरह क्या पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें कैसे दिखते हैं उनमें लक्षण</a></strong></p> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p> </div>

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दिल्ली के प्रदूषण से बचना है तो बदल लें लाइफस्टाइल, ऐसे रखें खुद का ख्याल

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महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज कब हो जाता है खतरनाक, कब तक ये नॉर्मल है?

<p style="text-align: justify;">महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज आना एक सामान्य प्रक्रिया होती है. इसे मेडिकल लैंग्वेज में ल्यूकोरिया कहा जाता है. यह वजाइना को साफ, नम और संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है. ज्यादातर महिलाओं में यह ओव्यूलेशन पीरियड से पहले या बाद में या हार्मोनल बदलाव के कारण होता है. कभी-कभी तनाव कमजोरी या नींद की कमी की वजह से भी व्हाइट डिस्चार्ज हो सकता है.</p> <p style="text-align: justify;">जब तक व्हाइट डिस्चार्ज में कोई बदबू, खुजली या रंग में बदलाव नहीं होता है, तब तक यह पूरी तरह सामान्य माना जाता है और शरीर के हेल्दी फंक्शन का संकेत होता है, लेकिन कई बार महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज खतरनाक हो जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि महिलाओं में कब व्हाइट डिस्चार्ज खतरनाक हो जाता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कब होता है व्हाइट डिस्चार्ज खतरनाक?</strong></p> <p style="text-align: justify;">अगर व्हाइट डिस्चार्ज की मात्रा ज्यादा हो जाए, रंग पीला, हरा या भूरा दिखने लगे और उसमें बदबू आने लगे तो यह किसी संक्रमण या बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसी कंडीशन में वजाइना में खुजली, जलन या दर्द महसूस होता है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि नॉर्मल डिस्चार्ज से डरने की बात नहीं होती है, लेकिन इसके रंग या गंध में बदलाव कई बीमारियों का संकेत दे सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि बैक्टीरियल वेजिनोसिस जैसी समस्याओं में डिस्चार्ज पतला और बदबूदार हो जाता है. वहीं ट्राइकोमोनियासिस में डिस्चार्ज पीला या हरा दिखता है. इसके अलावा फंगल इन्फेक्शन में यह गाढ़ा दिखाई देता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>&nbsp;व्हाइट डिस्चार्ज &nbsp;के आम कारण</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li>हार्मोनल बदलाव- ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन के बढ़ने से वजाइना में व्हाइट डिस्चार्ज होता है.</li> <li>प्रेगनेंसी- शुरुआती प्रेगनेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण भी व्हाइट डिस्चार्ज बढ़ सकता है.</li> <li>यीस्ट इंफेक्शन- फंगस ज्यादा होने की वजह से महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज हो सकता है.</li> <li>बैक्टीरियल वेजिनोसिस- वजाइना के बैक्टीरिया में असंतुलन के कारण भी वाइट डिस्चार्ज हो सकता है.</li> <li>तनाव और नींद की कमी- तनाव और नींद की कमी भी अस्थाई रूप से हार्मोन के लेवल को प्रभावित करती है, जिसके कारण महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज होता है.</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>किन लक्षणों के होने पर करना चाहिए डॉक्टर से संपर्क?</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li>अगर व्हाइट डिस्चार्ज &nbsp;के समय खुजली, जलन या बदबू आने लगे तो आपको इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.</li> <li>इसके अलावा &nbsp;व्हाइट डिस्चार्ज गंध या झागदार बनने लगे तो भी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.</li> <li>डिस्चार्ज का रंग पीला, हरा या भूरा होने पर भी आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.</li> <li>अगर व्हाइट डिस्चार्ज के समय रेशे या स्किन में सूजन जैसे दिक्कतें होती है तो भी आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>&nbsp;व्हाइट डिस्चार्ज के संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li>व्हाइट डिस्चार्ज में होने वाले संक्रमण से बचने के लिए महिलाओं को रोजाना वजाइना की साफ-सफाई का ध्यान रखना और सिंथेटिक के बजाए सूती अंडर गारमेंट्स पहनने चाहिए.</li> <li>इसके अलावा गीले कपड़े या पेटी लाइनर लंबे समय तक नहीं पहने चाहिए.</li> <li>वहीं प्राइवेट पार्ट्स को सूखा और साफ रखना चाहिए.</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/20-minute-daily-walk-vs-10-lakh-home-gym-cardiologist-explains-what-truly-best-for-your-heart-3038035#google_vignette">Daily walk: 20 मिनट की डेली वॉक या 10 लाख रुपये का होम जिम, आपके हार्ट के लिए क्या बेस्ट? कार्डियोलॉजिस्ट से समझें फायदे का सौदा</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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खून में घुसकर नसों में सूजन पैदा कर रहा दिल्ली का प्रदूषण, धीरे-धीरे मौत के करीब आ रहा आम इंसान!

<div id=":3pz" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" style="text-align: justify;" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":3se" aria-controls=":3se" aria-expanded="false"> <p>दिल्ली एनसीआर में बढ़ता हुआ एयर क्वालिटी इंडेक्स अब गंभीर चिंता का कारण बन गया है. दिल्ली की जहरीली हवा अब न केवल फेफड़ों तक सीमित रही बल्कि इसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली एनसीआर का प्रदूषण ऑटोइम्यून डिजीज जैसे रूमेटाइड आर्थराइटिस का कारण भी बन सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दिल्ली एनसीआर की जहरीली हवा सिर्फ फेफड़े ही नहीं बल्कि दिमाग और दिल पर भी कैसे असर कर रही है. <br /><br /><strong>दिल्ली की हवा से दिल की सेहत पर बढ़ता खतरा </strong><br /><br />दिल्ली की जहरीली हवा को देखते हुए एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रदूषित हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे छोटे-छोटे कण खून में घुसकर नसों में सूजन पैदा कर देते हैं. वहीं यह सूजन ब्लड क्लोट बनने का कारण बनती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर या होर्डेड आर्टरीज की समस्या है, उनके लिए यह प्रदूषण और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि दिल को प्रदूषण के असर से बचाने के लिए लोगों में हवा के संपर्क को कम करना, साफ हवा की पहल को बढ़ावा देना, और हार्ट हेल्थ को लेकर जागरूकता जरूरी है. <br /><br /><strong>दिमाग और मेंटल हेल्थ पर भी असर </strong><br /><br />दिल्ली की जहरीली हवा अब सिर्फ फेफड़ों ही नहीं बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर डाल रही है. एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से दिमाग पर खतरनाक असर पड़ सकता है. प्रदूषण के कारण न्यूरो इन्फ्लेमेशन यानी दिमाग में सूजन हो सकती है, जिससे न्यूरॉनकनेक्शन कमजोर होते हैं. न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बिगड़ता है और अल्जाइमर व पार्किंसंस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जहरीली हवा ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाती है जिससे मेमोरी, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता पर असर पड़ता है. वहीं बच्चों में यह कंडीशन और गंभीर हो सकती है क्योंकि इस समय उनके दिमाग की ग्रोथ चल रही होती है. ऐसे में प्रदूषित हवा से बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और ADHD जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियां बढ़ सकती है.<br /><br /><strong>डिप्रेशन और आत्महत्या का खतरा भी बढ़ रहा </strong><br /><br />एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जो लोग पिछले 5 सालों से प्रदूषण के हाई लेवल वाले इलाकों में रह रहे हैं, उनमें डिप्रेशन और सुसाइड के थॉट्स और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट जैसे लक्षण बढ़ रहे हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि विशेष रूप से बच्चे इसके ज्यादा खतरे में है, क्योंकि उनके विकसित होते दिमाग पर प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है. इससे डिप्रेशन, स्किजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और सुसाइडल थॉट्स का खतरा बढ़ जाता है.</p> <p><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/obesity-study-reveals-obese-people-may-have-lower-risk-of-heart-diseases-due-to-mc4r-gene-mutation-3038383">मोटे लोगों के लिए खुशखबरी! दिल की बीमारियों का रहता है खतरा कम, सामने आई चौंकाने वाली स्टडी</a></strong></p> <div id=":25v" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":28a" aria-controls=":28a" aria-expanded="false"> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p> </div> </div>

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40 की उम्र पार करते ही महिला और पुरुष को कराने चाहिए ये टेस्ट, यहां देख लें अलग-अलग लिस्ट

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Bharti singh 2nd pregnancy: प्रेग्नेंसी में प्रोटीन कम होना बच्चे के लिए कितना खतरनाक? भारती सिंह की इसी के चलते तबीयत हुई खराब

<p style="text-align: justify;"><strong>Bharti singh pregnancy</strong>: कॉमेडियन भारती सिंह के घर एक बार फिर खुशियों की लहर दौड़ने वाली है. वह दूसरी बार मां बनने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की अनाउंसमेंट की थी, जिसकी जानकारी उन्होंने स्विट्जरलैंड ट्रिप के दौरान अपने फैंस के साथ साझा की थी. भारती अक्सर अपने यूट्यूब व्लॉग्स के जरिए अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े अपडेट देती रहती हैं.<br />अपने ताजा व्लॉग में भारती ने बताया कि इन दिनों उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है. जांच में पता चला कि उनके शरीर में प्रोटीन का स्तर सामान्य से कम है. उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान ऐसा नहीं होना चाहिए, क्योंकि प्रोटीन मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर प्रेग्नेंसी में प्रोटीन की कमी बच्चे और मां के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कितना कम नहीं होना चाहिए प्रोटीन</strong></p> <p style="text-align: justify;">Mayo Clinic के अनुसार, एक गर्भवती महिला को रोजाना लगभग 71 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. यह मात्रा सामान्य महिलाओं की तुलना में कहीं अधिक है क्योंकि इस समय शरीर को न सिर्फ खुद की जरूरतें पूरी करनी होती हैं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास के लिए भी प्रोटीन चाहिए होता है. प्रोटीन बच्चे की मांसपेशियों, हड्डियों, त्वचा, बालों और अंगों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है. यह प्लेसेंटा के विकास में भी मदद करता है, जो बच्चे तक पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्रोटीन सही न होने के नुकसान</strong></p> <p style="text-align: justify;">अब बात करते हैं कि अगर शरीर में सही मात्रा में प्रोटीन नहीं है, तो इससे क्या नुकसान हो सकता है. अगर गर्भवती महिला के आहार में पर्याप्त प्रोटीन न हो, तो उसके शरीर और बच्चे दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है. PMC के अनुसार, अगर शरीर में सही मात्रा में प्रोटीन नहीं है, तो इससे बच्चे का विकास धीमा हो सकता है या उसका वजन सामान्य से कम रह सकता है. इसके अलावा जन्म के समय बच्चे का वजन काफी कम भी हो सकता है. अगर मां को होने वाले खतरों की बात करें, तो मां में एनीमिया, कमजोरी, सूजन और ब्लड प्रेशर की समस्या होने का खतरा बना रहता है. इसके अलावा प्रीमैच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले प्रसव का खतरा होता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>किन विटामिन की होती है सबसे ज्यादा जरूरत</strong></p> <p style="text-align: justify;">अगर आप प्रेग्नेंट हैं और आपके शरीर में विटामिन की कमी है, तो उसके लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने होंगे. जैसे कि डाइट में कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करना होगा. इसमें दूध, दही, पनीर कुछ भी हो सकता है. आप अपनी डाइट में पोल्ट्री और मछली को भी शामिल कर सकते हैं. बादाम, अखरोट, मूंगफली, कद्दू के बीज को विटामिन का अच्छा सोर्स माना जाता है, तो आप इनको भी शामिल कर सकते हैं.</p> <p><strong>&nbsp;इसे भी पढ़ें-&nbsp;<a title="पानी पीते ही लगने लगती है पेशाब, शरीर में हो सकती है ये दिक्कत" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/frequent-urination-after-drinking-water-causes-and-health-problems-3036887" target="_self">पानी पीते ही लगने लगती है पेशाब, शरीर में हो सकती है ये दिक्कत</a></strong></p> <p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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