Asrani Death: तिल-तिल तड़पता है इंसान और घुटने लगती हैं सांसें, इस खतरनाक बीमारी ने छीनी असरानी की जिंदगी

Asrani Death: तिल-तिल तड़पता है इंसान और घुटने लगती हैं सांसें, इस खतरनाक बीमारी ने छीनी असरानी की जिंदगी

<p style=”text-align: justify;”>अपने चुटीले अंदाज से हर किसी को हंसाने वाले बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन असरानी (84 साल) अपने चाहने वालों को रोता-बिलखता छोड़कर इस दुनिया से कूच कर गए. उन्होंने सोमवार (20 अक्टूबर) दोपहर करीब 3 बजे आखिरी सांस ली. बताया जा रहा है कि असरानी फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. आइए जानते हैं कि फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए पॉल्यूशन कितना खतरनाक होता है?&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>कैसे बिगड़ती गई असरानी की तबीयत?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>जानकारी के मुताबिक, असरानी 5 दिन से मुंबई के आरोग्य निधि अस्पताल में एडमिट थे. डॉक्टरों ने बताया कि उनकी क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज (COPD) बिगड़ गई थी. सांस लेने में दिक्कत इतनी बढ़ गई थी कि उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा. डॉक्टरों की मानें तो ऐसे मरीजों के लिए पटाखों के धुएं से होने वाला पॉल्यूशन काफी ज्यादा खतरनाक होता है. दरअसल, फायरक्रैकर्स से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड फेफड़ों की नलियों को सिकोड़ देते हैं. इससे सांस फूलने, खांसी और ब्रॉन्काइटिस आदि की दिक्कत बढ़ जाती है. ऐसे पॉल्शून की वजह से असरानी जैसे बुजुर्गों में फेफड़ों की क्षमता 30 पर्सेंट तक कम हो जाती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>मुंबई में कितना रहा पॉल्यूशन?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>दिवाली वाले दिन यानी 20 अक्टूबर की बात करें तो देश की आर्थिक राजधानी मुंबई भी पॉल्यूशन से जूझती नजर आई. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की वेबसाइट के मुताबिक, मुंबई में 20 अक्टूबर को दिनभर पीएम 2.5 औसतन 339 &nbsp;माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो डब्ल्यूएचओ की लिमिट 50 से करीब 6 गुना ज्यादा है. हवा में मौजूद पीएम 2.5 के कण फेफड़ों के अंदर घुसकर सूजन पैदा करते हैं. इंडियन चेस्ट सोसायटी की रिपोर्ट कहती है कि दिवाली के बाद रेस्पिरेटरी इंफेक्शन 40 पर्सेंट बढ़ जाते हैं.&nbsp;</p>
<p style=”text-align: justify;”><br /><img src=”https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/10/20/cb24e872f7386da291481a2302ba0b9217609784481151257_original.jpg” /></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>फेफड़ों के मरीजों के लिए पॉल्यूशन कितना खतरनाक?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>डॉक्टरों का कहना है कि दिवाली का प्रदूषण फेफड़ों के लिए जहर है. दिल्ली के विनायक हेल्थ हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राधिका शर्मा के मुताबिक, दिवाली के बाद स्मॉग का असर एक हफ्ते तक रहता है. इससे फेफड़ों की फंक्शनिंग 25 पर्सेंट कम हो जाती है. वहीं, क्रॉनिक बीमारियों जैसे COPD या अस्थमा वाले मरीजों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. दरअसल, PM2.5 के कण खून में घुसकर हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ाते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>दिवाली के पॉल्यूशन से कैसे बचें?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>दिल्ली AIIMS में अडिशनल प्रोफेसर सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. हर्षल आर सल्वे के मुताबिक, दिवाली का प्रदूषण शॉर्ट-टर्म में अस्थमा और COPD बढ़ाता है. वहीं, लॉन्ग-टर्म में कार्डियो-रेस्पिरेटरी डिजीज, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा AQI 335 पर सांस की बीमारियां 40 पर्सेंट तक बिगड़ जाती है. ऐसे में किसी भी तरह की दिक्कत से बचने के लिए मास्क लगाना चाहिए.</p>
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<p><strong>Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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